"तुम ही सही, हम गलत हैं।" कभी खुद को मिटाया, कभी तुम्हें खुदा बनाया...अब बस इतना कहने आए हैं — तुम ही सही, हम गलत हैं।पर इस बार शायद… सच में जा रहे हैं। 💔 हिंदी कविता
हर बार की तरह इस बार भी मान लिया हमने,
तुम ही सही, हम गलत हैं ।
तुम्हारा कोई दोष नही ,
सारा कसूर मेरा है।
तेरा ग़ुस्सा भी समझ में आता है ,
हमारे लफ़्ज़ों की तासीर ही बेजान निकली।
तूम तो सच ही कहती थी हरदम,
हमारी तो हर बात ही झूठी और बेजान निकली।
तुम ही सही, हम गलत हैं, http://superindiastory.blogspot.com/2025/05/blog-post_26.html
इश्क़ करना भी कोई समझदारी है क्या?
दिल को तुम्हारे हवाले कर बैठे,
ख़ुद की हार पे भी हामी भर बैठे।
हमने चाहा कि रिश्ता बचे,
तुमने चाहा कि 'मैं' बचे।
हमने हर मोड़ पर खुद को मिटता पाया,
तुमने तो हर बार हमें ही आज़माया।
तुम्हारे लिए सब कुछ थी समझदारी,
हमारे लिए तो बस ये एहसास है भारी।
तुमने तो वक़्त का तक़ाज़ा देखा,
हमने तो तुझमें ही खुदा देखा।
तुम ही सही, हम गलत हैं,
ये अब आदत बन गया है।
रातों की नींद, आंखों की नमी,
सब पर तेरा हक़ बन गया है।
तूम मुस्कुराती हो, हम रो लेते हैं,
तू आगे बढ़ जाती हो, हम राहें खो देते हैं।
तेरी जीत में भी शामिल हैं हम,
तेरे हर गम में भी हम शामिल हैं। http://superindiastory.blogspot.com/2025/05/blog-post_582.html
कभी सोचा नहीं कि खुद से माफ़ी मांगेंगे,
अब कैसे करें किसी पर यकीन,
बेदर्द दुनियां में, आशिक अब दर्द की दवा ढूंढेंगे।
तुम्हें खुश देखना था, देख लिया
अब खुद को तन्हा छोड़ चले ,
इश्क की गलियां अब हम छोड़ चले।
अब तुम जहां भी रहो, खुश रहो,
हम अब शिकायत नहीं करेंगे।
तुम ही सही, हम गलत हैं,
आख़िरी बार कह रहे हैं…
पर इस बार शायद,
सच में जा रहे हैं।
संयोग कुमार ठाकुर
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