"तोहार अखियन के नशा" – जब नजरिया बोल जाला प्यार के कहानी । ठाकुर संयोग कुमार के कलम से

कविता: "तोहार अखियन के नशा"

सांचे कहत बानी, हम प्यार तोहसे करीले,
तू मान चाहे ना मान, दिल त तोहरे खातिर धड़कत रहेला।
ना भइल इच्‍छा से, ना भइल सोच-समझ के,
ई त बस तोहरे नयना के जादू ह, जवन हमरा के आपन बनावेला।

तोहार अखियां जइसे, रात के चांदनी में भींजल गागर,
हर नजरिया में लहर बा, 
हर झपकन में बेकरारी के सागर।
जब तू देखेलू, त लागेला समय ठहर गइल बाटे,
उ नजरिया में अइसन आग बा, जवन दिल के राख कर देला।

हम तोहार बात ना करत बानी, तोहार नयन के बात करत बानी,
जेकरा में हम रोज़ डूबिले रात दिन , जइसे मोती खोजत मछुआरन।
ना तहरा से उम्मीद बा, ना तहरा से शिकायत बा,
बस ई प्रेम के सुरूर बा, 
जेकरा में हमार के चैन भूलाइल बा।

तू मुस्कुरावेलू, त लागेला 
सगरो जहां में मिठास घुल गइल बा,
तोहार एक नजर हमरा दिन के उजियारा बना देले।
का तू जानेलू, तोहार पलकन के झपकन में,
हमरा जिनगी के सबसे सुहाना - 
सपना तोहरा नैना में बसेला।

रात में जब तारा टिमटिमावे,
हम तोहार आँखियन में उ चमक देखल करींले।
हम त जागते-जागते भी तोहर नयनन में डूबल रहीले,
नींद में अब सपना भी तोहरे बिना ना आवेला।

तू कहबू की ई सब पागलपन ह,
तू कहबू की ई बस दिल के भरम ह।
बाकिर हम त इहे कहब, 
ई त खुदा के दिहल सच्चा नजराना ह,
जेकरा में ना कोई दिखावा बा, ना कोई बहाना ह।

तोहार अखियां... उ किताब ह 
जवन हम रोज पढ़ल करीले ,
हर पन्ना में तोहार प्रेम के कहानी लिखल बा ।
हम त बस इहे चाहत बानी कि तू एक बेर देख,
ई दिल के पुकार ह, जे तोहरा अखियां में बसल बा।

चाहे तू दूर जा, चाहे कबहु ना बोल,
हम त हर जन्म, तोहरे नयनन के दिवाना रहीले।
तोहर नशा में डुबल रहिले,सांचे कहत बानी हम,
पल-पल तोहार याद में, हम खुद के भुलाइल रहिले।

संयोग कुमार ठाकुर 

ई कविता काहे खास बा?

भोजपुरी भावनात्मकता: देसी जुबान में गहिरा प्यार के बयान।

प्राकृतिक रूपक: चांद, रात, तारा – प्रेम के प्रतीक।

               नयन से नाता:      
जब शब्द ना बोले, तब नजर सब कुछ कह जाले।
प्यार शब्द से ना, नजर से शुरू होला।
कबहु-कबहु केहू के नयन एतना गहिरा होला कि ऊ सीधा दिल में उतर जाला। ई कविता "तोहार अखियन के नशा" ओही अंजुरी भाव के अभिव्यक्ति ह – जहाँ नजरिया नशा बन जाला, आवाज़ से पहिलहीं दिल के बात समझ जाला।

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