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अक्टूबर 28, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
चल उठा मसाल क्रांती की The spice of revolution started
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यह कविता "आतिशबाजी पे आतिशबाजी" दीपावली की चमक-धमक और उल्लास का प्रतीक है। इसमें रंग-बिरंगी आतिशबाजियों की सुंदरता, आसमान में फैलते हुए रंगीन रोशनी और ध्वनियों का जिक्र है। यह कविता दीवाली की रात को जीवंत करती है, जब हर तरफ रौशनी और खुशियों का माहौल होता है। पटाखों की गूंज, आसमान में चमकते फुलझड़ी के नज़ारे और बच्चों की हंसी, इस कविता में उत्सव का रंग भरते हैं।
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