"राधा रूठी बैठी हैं ।" हिंदी कविता
राधा रूठी बैठी हैं ।
राधा रूठी बैठी हैं श्याम से,
श्याम मनाने आए हैं।
बंसी की मीठी धुन,
राधा को सुनाने आए हैं।
मुख मोड़ लिया राधा ने, नयन से छलकते पानी,
श्याम खड़े हैं मौन वहाँ, क्यों राधा बनी बेगानी?
बोली राधा तीर गुस्से में, अब फिर कभी ना आना,
जो संग छोड़ा बीच पथ में, अब क्यों निभाना?
श्याम ने जोड़े करबद्ध, बोले मधुर स्वर में,
राधे! बिना तेरे ये मन, सूना सूना निर्मल लागे।
गोकुल की गलियाँ सूनी, सूनी वृंदा वन वीरान,
तेरे बिना जीवन मेरा, जैसे सूखे तिनका समान।
राधा ने आँसू पोंछे, पर नयन अभी भी रोए,
श्याम ने फिर सुनाया वो बंसी की धुन,
और वो प्रेम भरे वो दोहे।
धीरे-धीरे पिघल गईं राधा, फिर नजरें उठाईं,
राधा ने बाँसुरी जब थामी,
श्याम के मुस्कान अधरों पर आई।
रंग सजीले फिर घुले, रास हुआ आनंद,
राधा बिना श्याम अधूरा
श्याम बिना अधूरी थीं राधा ,
है प्रेम का यही सुगंध।
श्याम की जब बजती है बंसी
गूंजे वृंदावन में प्रेम की धून।
संयोग कुमार ठाकुर
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राधे राधे .........
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