"बह चली है यादों की दरिया ।" हिंदी कविता
💜बह चली है यादों की दरिया ।💜
बह चली है यादों की दरिया,
इस दरिया को क्या नाम दूं।
हर लहर में तू ही दिखे,
इस सन्नाटा में क्या पैगाम दूं।
भीगी भीगी इन रातों में,
तेरी बातों की गूंज है।
सपनों की उन गलियों में,
अब भी तेरी ही धूप है।
चलती हवा से पूछूं मैं,
क्या उसने तुझसे मुलाकात की?
या फिर मेरी तरह वो भी,
बस तेरी तलाश में बेताब थी?
वो जो छत की मुंडेर पर
तेरे संग चांदनी बैठी थी,
अब खाली-खाली सी लगती है उदास,
जैसे कोई बात रह गई हो अधूरी,
पूरे न हुए वो ख्वाब।
तेरे हँसने की आवाज़,
अब भी दीवारों से टकराती है।
मेरा दिल, जो हर रोज़,
तेरी परछाई से बात करती है।
वो लम्हे जो हमने बाँटे थे,
आज किसी किताब के पन्नों में हैं,
उन शब्दों की गर्मी अब भी,
मेरे सीने में आग की तरह जलती है।
जाके कोई तो बताए उस दरिया को,
उस दरिया में मेरी रूह बहती है।
हर एक बूँद में एक किस्सा है मेरा,
जो तेरी यादों से कहती है।
कभी लगता है ,ये दरिया-
जैसे तेरे गालों की नमी है ।
कभी बन जाती है आँसू,
तो कभी मेरी आँखों से बहती है।
तो बता
इस दरिया को नाम दूं क्या?
तेरी मोहब्बत, या मेरी तन्हाई?
या फिर बस यूँ ही रहने दूं,
एक अनकहा सा राज़ की गहराई।
क्योंकि कुछ कहानियाँ नाम नहीं लेती,
बस एहसास बनकर जीती हैं,
और कुछ दरिया यूँ ही बहते हैं ।
बिना किनारे, बिना मंज़िल,
बस दिल की ज़ुबानी कहते हैं।
तो रहने दो इसे बेनाम ही,
क्योंकि नाम बंधन है,
ये तो आज़ाद बहती है।
मेरी रूह से जुड़ी, तेरी यादों से भरी,
ये दरिया अब मेरी पहचान कहती है।
संयोग कुमार ठाकुर
😇💞इमोशन :-
1. "कुछ दरिया नाम नहीं लेते... बस बहते रहते हैं... तेरी यादों के साथ..."
2. "जब मोहब्बत लफ़्ज़ों से बाहर बहने लगे, तो कविता बन जाती है।
3. "हर एक बूँद में एक कहानी है... और हर कहानी में 'वो'।"
4."कभी तुम थे, अब बस तुम्हारी परछाई... और ये बहती दरिया।"
5. "तुमसे बिछड़कर भी जो नहीं टूटी... वो मेरी यादों की दरिया है।"
💥क्या आप इस तरह से सोचते हैं? कॉमेंट में बताएं।
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