"काहे नैना नीर बहाए – एक भावुक कविता जो हर टूटे दिल की आवाज़ है"

काहे नैना नीर बहाए ।   http://superindiastory.blogspot.com/2025/04/money-is-identity-hindi-poetry.html

काहे नैना नीर बहाए,
कुछ तो बता दो ना,
क्या पीर उठी है दिल में,
नयन से नयन को समझा दो ना।

चुपके चुपके रात ढली है,
मन की छाया भी भीग गई,
तारों ने भी देखा होगा,
चांद भी रोया होगा ।

बातें जो लबों तक आई न हों,
वो सिसकियों में ढल जाएं,
ऐसा क्या टूटा है मन के भीतर,
जो नैनों से अश्क बाहर आए?
क्या पीर उठी है दिल में,
नयन से नयन को ये समझा दो ना।
धड़कनों में बेमौसम शोर है,
हर सांस में बेबसी का जोर है,
क्या किसी ने तोड़ा है वादा,
या खुद से ही कोई बैर है?

दर्पण भी जब खुद को देखे,
चेहरा ना पढ़ पाए,
तो सोचो दिल के आईने में,
कितनी दरारें होंगी ।
ये कोई कैसे दिखलाए। 
बस रोए नैना, बात समझ ना पाए।
क्या पीर उठी है दिल में,
नयन से नयन को  ये समझा दो ना।

चलो एक बार कह ही दो,
चुप्पी को आवाज़ दो।
आंसू बहाने से पहले,
मुझे एक नज़र तो प्यार से देखो।

मैं सुनने को तैयार हूं,
तेरे मन की हर उस गूंज को,
ना बिखड़े सपने तेरे ,
हर सपने हो पूरे।

काहे नैना नीर बहाए,
कुछ तो बता दो ना,
क्या पीर उठी है दिल में,
नयन से नयन को ये समझा दो ना।

बात कहो, बात बनेंगे,
राह कहो, साथ चलेंगे।
कह न सको तो बस इतना ,
मेरे कांधे पर सिर रख लो।
नैना का हर एक आंसू,
कुछ कहता है, कुछ सहता है,
मैं भीग जाऊं इस सैलाब में,
तो शायद मुझे भी चैन मिलेगा।

काहे नैना नीर बहाए,
कुछ तो बता दो ना,
क्या पीर उठी है दिल में,
नयन से नयन को ये समझा दो ना।
                     संयोग कुमार ठाकुर 

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