"तोहर अखियन में आपन रुपवा निरेखत बानी" संयोग कुमार ठाकुर के भोजपुरी में लिखल गीत, गज़ल, और बेहतरीन कविता

💝तोहर अखियन में आपन रुपवा निरेखत बानी ।👄💙

तोहर अखियन में आपन रुपवा निरेखत बानी,
ना जाने कइसन जादू बा, तोहरा अंखिया में,
तोहरा अखिया में देख के हम जीयत बानी।
जैसे केहू देखेला शीशा में, 
का ओइसे ही हम तोहर नयना में बसल बानी।

एह नजरिया के गहराई में, चुपचाप भोर होखे द,
तू कुछ ना बोल, बाकिर अपना नैना से बात होखे द।
ना कवनो सवाल, ना जवाब के जरूरत बा,
तोहके देखला से ही त सांस हमर चलत बा।

जब तू मुस्कुरालु, त लागे दिन उजियार हो गइल बा नवा,
तोहर पलकन के छांव में मिलेला सुकून के हवा।
एतना कोमल बा एह भाव के एहसास, की 
जइसे मंदिर में जलत बा दीप, 
ओइसे मन में बा तोहरा ला प्यार खास ।
तोहरा अखियां में जवन चमक बा,
उ दुनिया के रोशनी हवे,
हमरा अंधियारा मन में उ बनल 
प्रकाश के एगो  रोशनी हवे।

तोहके देख के, हम आपन असल पहचान पवनी,
एह प्रेम में हम कब के बदल गइल बानी।
एकर कारण तोहरा अखियां में छिपल हवे।

तू जब नजर फेरेलू, त जी ना लागेला,
मन दर-दर भटके, सासें ठहर जाला।
जवन एक बेर देख के, हमरा दिल में घर बसा लेलु,
ओही नजर के खोज में दिन-रात बीत जाला।

तोहार नयन त सागर से भी गहरा बा,
जहाँ डूबे के मन करी, ना उबरे के डर बा।
हम रोज-रोज ओहि गहराई में उतरत बानी,
तोहरे प्रेम में हर रोज नवका जनम लेत बानी।
तोहर अखियन में आपन रुपवा निरेखत बानी,
ई एगो चाहत ह, ना कोई दीवानगी के कहानी।
ई त पूजा बा, एही से तोहार दर्शन करत बानी,
तोहर नैना लागेला प्रेम के सागर, 
एही से तोहरा नजरिया में डूबत  बानी।
                         संयोग कुमार ठाकुर 
"का रउआ केहू के नयन में आपन प्रेम के दर्पण देखले बानी?
टिप्पणी में जरूर बताईं, राउर अनुभव...
तबले ए कविता के शेयर करीं, जेहसे आउर दिल तक ई बात पहुँच सके।"



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