"अब कोई भी आईना अच्छा नहीं लगता।"इश्क़ की वो तड़प, जो हर आईने में उसी को ढूंढती है । हिंदी कविता
जब खुद को संवारा तेरी आँखों में देख कर,
अब कोई भी आईना अच्छा नहीं लगता।
तेरी सूरत में बसी है मेरी दुनियां,
सिवा तेरे कोई सपना अब अच्छा नहीं लगता।
लोग कहते हैं मोहब्बत में ज़माना छोड़ देंगे,
पर तुझे छोड़ दूँ ,ये फ़ैसला अच्छा नहीं लगता।
तेरी सांसों में बसी है शायद रूह मेरी,
इसलिए तुझसे जुदाई अब सहा नही जाता,
कोई और देखे तुझे, ये मुझसे गवारा,
तुझपे कोई और हक़ जताए, ये अच्छा नहीं लगता।
हर जगह बस तेरा ही चेहरा दिखाई देता है मुझे,
चाहे कहीं भीड़ हो या तन्हाई ,
सिवा तेरे अब कुछ भी अच्छा नहीं लगता।
ये संयोग भी अब तो तुझमें ही खुदा देखता है,
तेरे सिवा अब कोई सजदा अच्छा नहीं लगता।
संयोग कुमार ठाकुर
💬👍> "क्या कभी आपने भी किसी को इस तरह चाहा है कि आईना भी अधूरा लगने लगा ?"
"आपके लिए 'सच्चा प्यार' क्या मायने रखता है? कमेंट में ज़रूर बताएं।"
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