मैं कौन हूँ? – आत्मा की तलाश में भटकता एक सवाल। हिंदी कविता


  💢मैं कौन हूँ?💢

मैं कौन हूँ, ये पूछता है मन मेरा,
हर रोज़ आईना देखता हूं।
चेहरे पे मुस्कान है या नही ?
जब दिल कहीं ग़ुमसुम सा रहता मेरा।

भीड़ में खड़ा हूँ तन्हा और अकेला 
हर कोई कुछ कहता है,
पर मेरे अंदर की आवाज़ को
कोई नहीं सुनता है।

कभी लगता, मैं वो सपना हूँ,
जो किसी की नींद में टूटा हूं।
कभी लगता, मैं वो चुप्पी हूँ,
जो आंसुओं में भी न रूठा हूं।

मैं एक पत्ता हूँ सूखा-सा,
वक़्त की शाख से गिरा हूं।
या फिर बहती हवा का कुछ हिस्सा हूं,
जो मंज़िल तक कभी न रुका हूं।

कभी बचपन की गलियों में
खुशियों को ढूँढता  फिरता हूँ।
मिट्टी से बने वो खिलौने,
आज भी दिल में बुनता हूँ।
माँ की ममता, पापा की सीख,
जैसे सब धुंध में खो गए हैं कहीं।
अब खुद से खुद की बातों में,
कितने ही जज़्बात दिल में सो गए हैं कहीं।

कभी इश्क़ के रंग में डूबा था,
अब वक़्त ने धो डाले याद सब ।
किसी की हँसी में जी लिया,
किसी की चुप्पी से रो लेते हैं अब।

मैंने चाहा, मैं खुद खुदा बन जाऊँ,
ज़माने से अलग और जुदा हो जाऊँ, ।
पर हर मोड़ पे कोई मिला,
जो था मुझसे बेहतर खुदा।

मैंने हार मान ली कई बार,
पर अंदर से टूटा नहीं हूं।
हर चोट ने सिखाया है मुझको जीना,
ज़ख़्मों से मैं कोई रूठा नहीं हूं।

मैंने चाँद से बात की रातों में,
सूरज से लड़ाई की जज्बातों में।
अपने डर को सीने में रखकर,
सपनों की उड़ाई तिनके रातों में।

कभी पंछी बन उड़ जाना चाहा मै,
कभी दरिया बन बह जाना चाहा।
कभी पत्थर बन चुप रह जाना चाहा मै,
कभी फूल बन महक जाना चाहा।

मैं कौन हूँ? शायद एक कहानी हूं ,
जो अधूरी है, मगर सच्ची है।
हर मोड़ पे बदलती रही,
फिर भी अपनी रफ़्तार में पक्की है।

मैं वो सवाल हूँ, जो हर दिल में छुपा है,
मैं वो जवाब हूँ, जो हर सुकून में दफ़्न है।
मैं वो एहसास हूँ, जो शब्दों में नहीं बँधता,
मैं वो जज़्बा हूँ, जो हार के बाद भी ज़िंदा है रहता।

मुझे लम्हों की तलाश भटका रही है,
मैं खुद में ही इक राज़ हूँ।
मैं जीवन की तलाश हूँ,
मैं मौन की आवाज़ हूँ।

तो अगर तुम कभी मुझसे मिलो,
तो मुझसे मेरा नाम मत पूछना।
मेरी आँखों में देखना, मेरी ख़ामोशी सुनना,
क्योंकि मैं कोई नाम नहीं,
मैं तो बस एक “अहसास” हूँ।
                             संयोग कुमार ठाकुर 

अंत में...

तो जब कोई आपसे पूछे "आप कौन हैं?",
तो ज़रूरी नहीं कि आप कोई नाम या प्रोफेशन बताएं।
शायद आप सिर्फ़ कहें —
"मैं एक एहसास हूँ... जो अब भी ज़िंदा है..."

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट