"दिल में बस कुछ टूट रहा है।" हिंदी कविता

दिल में बस कुछ टूट रहा है।

शब्द नहीं है, पर मन चीखता है,
धड़कन जैसे कुछ पूछता है।
बाहर सब कुछ पहले जैसा लगता है,
दिल में बस कुछ टूट रहा है।

कभी रिश्तों की दीवारें दरकती हैं,
कभी आंखों से ख्वाब फिसलते हैं।
कोई मुस्कराहट पीछे से रोती है,
तो कोई याद, चुपचाप निगलती है।
क्या मालूम है उसको, क्या छुट रहा है,
दिल में बस कुछ टूट रहा है।


वो जो पहले दिल को छूते थे लम्हे,
अब कांटों जैसे चुभते हैं हर रात।
वो बातें जो जीना सिखाती थीं,
अब सिसकियों में रोती रहती हैं ।

दिल में एक खाली जगह बन गई है,
जहाँ पहले किसी की मौजूदगी थी।
अब हर साँस जैसे कोई सवाल बन गई है,
कि क्या वाकई वो ज़िन्दगी थी?
या अब जो जी रहा हूं वो जिंदगी है ।


कुछ टूटा है, पर आवाज़ नहीं हुई,
जैसे अंदर कोई मंदिर गिरा हो ।
ना कोई मलबा, ना कोई आवाज,
बस एक सन्नाटा — बहुत गहरा, बेहिसाब।

कोई तस्वीर है जो अब अधूरी लगती है,
जिसमें रंग हैं, पर रूह नहीं।
कोई गीत है जो गुनगुनाने को कहता है, 
वो सुर अब दिल को छूते नहीं,
दिल ही जाने क्या बीत रहा है।
दिल में बस कुछ टूट रहा है।


कभी - कभी लगता है— टूटना भी एक कला है,
क्योंकि हर दरार से कुछ सिखने को मिलता है।
शायद इसी टूटन में एक राह छुपी है,
जहाँ से खुद को फिर से जोड़ना शुरू होता है।

दिल टूटा है, पर खत्म नहीं हुआ,   
वो अब भी धड़कता है।
किसी नयी सुबह की उम्मीद में,
कभी बस यूँ ही, बिना किसी वजह के।
शायद यही तो जीवन है—
टूटना, बिखरना, फिर खुद को समेट लेना।
कल की सबसे मजबूत ईंट बन जाना उसे,
दिल में जो बस टूट रहा है ।


कुछ था ,जो संजोया था दिल के कोनों में,
वो सपना, वो रिश्ता, या कोई बात पुरानी।
अब धुंधला हो चला है सब कुछ,
जैसे बारिश में भीगते कागज़ पे लिखी कहानी।

हर धड़कन एक सिसकी सी लगती है,
जैसे कोई दर्द चुपचाप दिल में पलता है।
ना कोई सुनने वाला, ना कोई समझने वाला,
इस अकेलेपन का शोर अब बहुत गूंजने लगता है।

वो हँसी जो कभी बिना वजह आती थी,
अब आँखें भी बिन वजह आँसू बहाती है।
दिल पूछता है हर रोज़ आईने से
"तू वही है, या फिर कुछ और बन गया है?"

टूटना हमेशा आवाज़ नहीं करता,
कभी चुपचाप बिखर जाता है इंसान अंदर से।
जैसे काँच टूटे बिना , दरारें भर जाएं,
जैसे रोशनी हो, मगर उजाला न आए।

कभी लगता है — शायद ये दर्द भी ज़रूरी था,
शायद टूट कर ही कुछ नया जुड़ता है।
पर सच ये भी है कि हर टूटने से पहले,
कोई बहुत गहराई से जुड़ता है।
दिल अब भी उम्मीद करता है,
कि किसी रोज़ फिर से सब ठीक हो जाएगा।
पर वो दिन कब आएगा, कोई नहीं जानता,
बस एक अधूरी दुआ है जो साँसों में पलता है।
मै ये आखरी बार कहता हूं 
दिल में बस कुछ टूट रहा है।

                                  संयोग कुमार ठाकुर 

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