ग़ज़ल: वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा – एक अधूरी मोहब्बत की ग़ज़लकभी वो मेरी सांसों का हिस्सा था,आज उसकी याद भी सलीके से दफन करनी पड़ी।रिश्ते जब टूटते हैं, तो सिर्फ आवाज़ नहीं आती...

ग़ज़ल: वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा ।

वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा,
दिल में था जो चेहरा, वो चेहरा ना रहा।

हर लफ़्ज़ उसका अब ज़हर सा लगता है,
जिससे रौशन थी मेरी दुनियां, वो सवेरा ना रहा।
वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा।
दिल के हर मोड़ पर जिसकी तस्वीर सजाई थी मैंने,
अब तो वो तस्वीर भी हवा ले गई,
अब कोई भी मेरा सहारा ना रहा।
वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा ।

चलती थी साँसें कभी उसके ही नाम से,
अब वो ज़िक्र भी कोई उजाला ना रहा।
वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा।

उसकी हँसी में जो सुकून मिलता था मुझे,
अब उस हँसी में दर्द का साया दिखता है मुझे।
कहा था उसने "तुझसे सच्चा प्यार है,"
अब उसकी बातों में कोई वफ़ा ना रहा।
वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा ।

पीठ पीछे जिसको गैरों से कहते सुना,
उसके बाद कोई रिश्ता गहरा हमारा ना रहा।
वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा ।

तेरी तस्वीरें, और वो यादें, सब मिटा दिए मैंने,
अब दिल के घर में वो बसेरा ना रहा।
वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा ।

अब न शिकवा है कोई, न कोई गिला बाकी,
वो जो था कभी अपना, अब अपना ना रहा।
वो जो मेरा था, अब मेरा ना रहा 
   
                                संयोग कुमार ठाकुर 
👍💞💬
क्या आपने भी कभी किसी को पूरे दिल से चाहा और खो दिया?
नीचे कमेंट में अपनी कहानी लिखें… शायद शब्दों में सुकून मिल जाए।

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट