"जो न बोले वन्दे मातरम्,उसके भीतर कोई जान नहीं।"


जो न बोले वन्दे मातरम्,

उसके भीतर कोई जान नहीं।


जो न माने भारत मां को।

उसका कोई ईमान नहीं।

जो न बोले वन्दे मातरम्,

उसके भीतर कोई जान नहीं।


वन्दे मातरम् वो मंत्र है,

जिससे वीरों ने बल पाया।

जिसके उच्चारण से रणभूमि में,

हर दुश्मन थर-थर थर्राया।

http://superindiastory.blogspot.com/2023/05/spice-of-revolution-started.html

भारत की माटी सोना है,

इससे जो मुँह मोड़ेगा,

ऐसी सांसों में क्या रखा है,

जो भारत को ना जोड़ेगा?


जिस तिरंगे को देख न झुके ,

वो आँखें फिर किस काम की?

जो राष्ट्र गान गा पाए,

उसके मुंह में क्या जुबान नहीं?


जलियाँवाला लहू पुकारे,

काकोरी की रेल बतलाए,

वो भगत, आज़ाद, बिस्मिल का,

उधम-सा बलिदान चिल्लाए।


सरहद पर जो जवान खड़ा,

गर्मी, सर्दी, बारिश में,

वो "वन्दे मातरम्" गाता है,

हर साँस-हर नफ़ासिश में।


कश्मीर से कन्याकुमारी,

असम से कच्छ द्वार तक

हर कोना - कोना कहता है,

वन्दे मातरम ।


मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे,

सब में माँ भारती का वास है,

"वन्दे मातरम्" नारा नहीं,

यह रग-रग में खास है।


जिसे न लगे यह भूमि प्यारी,

जिसका न धड़के दिल यहां,

वो चाहे सौ वंदना भी कर ले,

मेरे लिए मां भारती ही खास है ।


तो आओ साथ बढ़ाएँ कदम,

राष्ट्रभक्ति की मशाल लिए,

हर गाँव, गली, हर नगर में हम,

भारत माँ की ढाल लिए।


"वन्दे मातरम्" की जयकार हो,

हर होठों पर यह गीत जचे,

देशभक्ति का यह दीपक फिर,

हर दिल में अनंत जले।


जिसने माँ भारती की माटी को,

पग-पग पर पूजा माना,

जिसके स्वर में गूंजे भारत,

उसने ही भारत को जाना।


जो न झुके तिरंगे के आगे,

क्या वह देशभक्त कहलाएगा?

जो न गाए जननी मां की जयघोष,

कैसे वीरों की गाथा गाएगा?


वन्दे मातरम् केवल शब्द नहीं,

यह भारत की आत्मा है,

यह वह अग्नि-ज्योति है जो,

हर वीर के सीने में थामा है।


जिसे नहीं गर्व इस मिट्टी पर,

वो खुद से भी अंजान है,

वो क्या जाने बलिदानों को,

जिसमें राष्ट्र का ना ज्ञान है।


उठो जवानों! ये हुंकार भरो,

हर दिल में गुंजे, आसमान में,

भारत के कोने - कोने में गुंजे

गूंजे सारे जहां में।

वन्दे मातरम। वन्दे मातरम।

http://superindiastory.blogspot.com/2025/05/operation-sindoor-hindi-poetry.html

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