"पैसा ही पहचान है।"Money is the identity. Hindi poetry



पैसा ही पहचान है।

काम था,कभी नाम था,
इंसानियत का भी सम्मान था।
अब दौर बदला, रंग नया है,
हर रिश्ते में छुपा है दाम।
अब पैसा ही पहचान है।

जिसके पास पैसा है,
वो ही सबसे खास है,
बिना कहे मिलते सलाम पे सलाम,
पैसों के आगे झुकते हैं ऊँचे मुकाम।
जात पात का यहां क्या काम,
अब पैसा ही पहचान है।

नज़रें बदलती हैं, बातों का अंदाज़,
गरीब का सच, अमीर का मज़ाक।
दिल की कीमत अब कौन पूछता है,
यहाँ हर चेहरा भी ब्रांड पूछता है।

शादी-ब्याह हो या कोई व्यापार,
सबसे पहले देखा जाए बैंक बेलेंस ।
संस्कार बिकते हैं पैकेज में यहाँ,
दहेज़ में छुपा है बेटी का जहाँ।

मां की ममता, बाप का पसीना,
सब फीका लगता है, 
जब खनकता है दौलत का सिक्का।
ज्ञान भी अब बिकाऊ हो गया है,
हर डिग्री का अब दाम लिखा है।

मंदिर में चढ़ावा, स्कूल की फीस,
पैसे बिना अब अधूरी है ख्वाहिश।
इश्क भी अब इंस्टाग्राम पोस्ट बना है,
दोगे गिफ्ट तभी प्यार माना मिलता है।

कल जो दोस्त थे, आज अनजान से हैं,
पास पैसे नही, इस लिए अब जाने पहचाने से हैं।
अब पहचान जो नोटों से बनती है,
अब इंसान नही, अब दौलत की कमी है।

गरीब की बातें लगती हैं बेमतलब,
उसकी सच्चाई भी झूठ लगती है ।
वो सच भी बोले तो कौन सुनता है?
क्योंकि अब इंसान नहीं , कपड़े का ब्रांड बोलता है।

एक वक्त था जब दिल देखा जाता था,
अब जूते का लेबल पहले परखा जाता है।
कभी आँखों में सपना होता था,
अब आंखों में बैलेंस शीट लिखा होता है।

दुनिया कहती है ! 
http://superindiastory.blogspot.com/2025/01/sanyog-hindi-and-english-poem.html

“अगर पैसा है, तो सबकुछ है,”
“नहीं तो तेरा वजूद भी अधूरा है।”
और अब सच भी क्या करें?
पैसा ही अब भगवान का रूप है धरे।

कभी खुद से ये सवाल कर लेना,
सन्नाटा जवाब देगा – हाँ या ना।
क्योंकि अब पैसा ज़रूरी है, ये इनकार नहीं,
पर क्या ये सबकुछ है? ये मुझे स्वीकार नहीं ।

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