"मैं कैद हूं तेरी नैनों में।" Hindi poetry

👄👵💗मैं कैद हूं तेरी नैनों में।💕💛

मैं कैद हूं तेरी नैनों में,
बसी है रूह मेरी , तेरी उन सायों में।
ना जंजीर चाहिए, ना दीवारें,
तेरा नाम ही काफी है मेरी रिहाई में।
तेरी आंखों की झीलों में डूबा,
हर ख्वाब मेरा तुझसे ही रूबरू है।
शहर से पहले, शाम के बाद,
तेरा चेहरा ही मेरे दिल का सुकून है।

हर अश्क जो गिरा तेरे गालों पे,
उसमें अपनी तक़दीर नज़र आई।
तू चुप भी रहे तो लगे जैसे,
मेरे नाम की तूने दुआ मांग कर हो आई।

तेरे नैनों की झील में उलझा हूं मैं,
हर लहरो पे तेरा ही नाम लिखता हूं।
तू पास न हो, फिर भी पास लगे,
मैं हर सांस में तुझे ही महसूस करता हूं।

ना कोई वजह, ना कोई सवाल,
तेरे इश्क में बेमोल बिकता हूं।
लोग कहते हैं पागल हो गया है,
कैद हूं तेरी नैनों में।

तू देख ले बस एक बार मुड़ के,
तो ये कायनात भी झुक जाए।
तेरी खामोशी भी कुछ कहती है,
जैसे हर लफ्ज़ मेरा रुक जाए।

मैं कैद हूं तेरी नैनों में,
ना रिहाई की आरज़ू, ना फरियाद है।
बस तू देखती रहे यूं ही,
मेरे लिए यही सबसे बड़ी बात है।
                        👍💬 संयोग कुमार ठाकुर 

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