"मुझे कैद कर दो अपनी आँखों में।"हिंदी कविता
मुझे कैद कर दो अपनी आँखों में।
मुझे कैद कर दो अपनी आँखों में,
जहाँ हर ख्वाब में बस तुम्हारा नाम हो,
जहाँ नीले आसमां की छांव हो,
और पलकों में कोई मीठा पैग़ाम हो।
तेरी नज़रों की खिड़की से देखूं मैं जहाँ,
तो लगे जैसे सब कुछ मेरा हो वहाँ,
तेरे नज़रों का जादू कुछ ऐसा चले,
कि दुनिया के सारे ग़म पल में फना हो जहाँ,।
तेरे नैनों की गहराई में डूब जाऊँ मैं,
बिना साँस लिए भी साँसों को पाऊँ मैं,
कोई तूफ़ान भी आकर मुझे छू न सके,
ऐसी महफूज़ पनाह तुझमें ही तो पाएँ मैं।
जब तूम देखती हो मुझे चुपचाप,
तो लगता है वक्त भी रुक जाएगा ख़्वाबों के साथ,
तेरी नज़रों में जो प्यार है छुपा,
वो कहता है मुझसे बार - बार — तू बस मेरा साया है।
तू बस मेरा साया है।
तेरे आँखों की दुनिया में रंगों का त्योहार है,
हर कोना उसमें मेरे इश्क़ का इकरार है,
न कोई बंदिश, न कोई सरहद की दीवार,
बस तू और मैं, और तेरी नजरों का प्यार।
तेरी पलकों की झीलों में मैं नाव- सा बन जाऊँ,
तेरे सपनों की गलियों में, मैं चुपचाप मुस्कुराऊँ,
मुझे डर ना कर अपनी नज़रों से ,
ना जी पाऊंगा, तु ही बता मैं तुमको कैसे समझाऊँ,।
मुझे आज़ाद न करना इन निगाहों की कैद से,
इस बंधन में ही तो है मेरी रूह की रहमत ,
तू चाहे तो भुला देना सारी दुनिया को,
पर मुझे याद रखना अपनी नज़रों में ,
हर वक्त मैं खुदा यही करता हूं इबादत।
तो ऐ मेरी जान, अगर इश्क़ है तुझसे हकीकत,
तो कर दे मुझे बंद अपनी नज़रों की हिफाज़त,
ना ज़रूरत किसी पिंजरे, ना दीवार की चाह है,
बस तेरी आँखों में ही हो मेरा बसेरा,
मेरे दिल की ये आखरी चाह है।
💞👍💬 संयोग कुमार ठाकुर
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