"ज़ुल्फ़ों की अदा" the style of hair Hindi poetry
ज़ुल्फ़ों की अदा
ऐसे ज़ुल्फ़ें न संवारिए, कि मेरा दिल धड़कता है,
तेरी हर अदा पे ऐ जान-ए-जाँ, ये आशिक़ बहकता है।
जो लहराए तेरी ज़ुल्फ़ें, तो मौसम भी मचल जाए,
इन घटाओं की नर्मी से, मेरा दिल पिघलता है।
तेरी आँखों की शबनम में, जो डूब गए ,वो उबर ना पाए?
ये कश्ती है दिल की दुनिया की, जो हर रोज़ बहकता है।
तेरी खुशबू में खो जाऊँ, तेरा जादू असर कर जाए,
तेरी हर अदा की कसम , ये दिल तुझ पे मरता है।
ऐसे ज़ुल्फ़ें न संवारिए, कि मेरा दिल धड़कता है,
तेरी यादों के साए में, ये दीवाना सिसकता है।
तेरी आंखों की दरिया में डूबने से डरता हूं,
पर तुझे पाने का इरादा भी है,
तेरी जुल्फों की अदा ऐसी,
कि हर चेहरे में तू ही नज़र आती है
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