"New love woke up in my mind"नूतन प्रीत जगी मन में

                नूतन प्रीत जगी मन में

नूतन प्रीत जगी मन में, जब से आई है नई बहार।
मन के आँगन में खिली कली, प्रेम-रंग लाई है।
सुनहरी धूप है खिली हुई, बगिया में मादक बयार,
नूतन प्रीत जगी मन में, जब से आई है नई बहार।
नील गगन में उड़ते पंछी, गीत खुशी के गाते हैं,
फूलों की कोमल पंखुड़ियाँ, हर सुख-दुख सह जाते हैं।
झरनों की निर्मल धारा में, मधुर प्रेम है बहता,
हृदय की वीणा के तारों को, कोई छेड़े और बजाए।
मन झूमे प्रेम धुन में, गीत गाए हजार 
नूतन प्रीत जगी मन में, जब से आई है नई बहार।

सज रही धरती दुल्हन-सी, हरियाली ओढ़े तन,
नदियाँ गा रहीं हैं सरगम, प्रेम-संगीत के स्वर में।
कोयल की मीठी कुहुक सुन, मन बावरा हो जाए,
हर शाख पे नव पत्ते आएँ, नव जीवन मुस्काए।

मन के सूने कोनों में भी, अब चाँदनी उतर आई,
अलसाई इच्छाओं ने भी, अब अंगड़ाई भर पाई।
चुपके से कोई कानों में, रसिया कुछ कहता है,
सपनों की नन्हीं कश्ती के, झूले पर कोई मौज करता है।

सांझ-सकारे ओस की बूँदें, जब गालों पर गिर जाती हैं,
जैसे प्रीत की स्याही लेकर, जब पाती कोई लिख जाती है।
हाथों में हाथ लिए चलना, जीवन की ये रीत सही,
संग रहे जब सच्चा साथी, राहें और रंगीन कर जाती है।
नूतन प्रीत जगी मन में, जब से आई है नई बहार।

नैनों में नई उमंग उठी, ओठों पर मीठी मुस्कान,
स्नेह, समर्पण, चाहत, अपनापन, मन के ये अरमान।
हर धड़कन में अब केवल, प्रेम की वीणा गूँज रही,
नूतन प्रीत जगी मन में, जब से आई है नई बहार।

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