"आओ अब घर लौट चलें"Come now let's go back home.


                   आओ अब घर लौट चलें ।
बहुत कर ली पढ़ाई , 
सब होशियार हो गये । 
टूट गये सभी रिस्ते-नाते, 
हम जो इतने समझदार हो गये हैं । 
एक हम ही सच्चे हैं , 
हम कभी अपनों के हुए ही नही , 
इस गुरूर में, 
वो वहम था हमारा, 
जो इस ओर चलें , 
आओ अब घर लौट चलें । .. 

कर के पढ़ाई , 
सभी बड़े विद्वान हुए , 
किसी ने तोप बनाया किसी ने मिसाइल , 
दुनियाँ ने बहुत सारे आविस्कार किये । 
उजाड़ कर घर किसी का , 
चले थे घर अपना बनाने , 
पर भुल गये इस बात को, 
बीन प्रकृति के सुकून कैसे पाएंगे । 
क्या सोच कर उजाड़ दिए वन सारे, 
अपना जीवन तो 
खुद के हाथो ही तबाह किए । 
दोष प्रकृति का देकर , 
न जाने कैसे - कैसे लोग महान बने । 
गले में पुष्प माला, 
तालियों की गड़ - गड़ाहट, 
क्या सच में लोग समझदार हो गये । 
भूल कर प्रकृति को हम किस ओर चले, 
आओ अब घर लौट चलें । .. 

जंगल काटा , काटा पतझड़ झाड़ी । 
बहुत बनाया बिल्डिंग, बहुत महल अटारी । 
बहुत उगाया फसल, बाग फल फूलवारी । 
फिर भी ना अच्छा सेहत पाया,
ना पाया फूल से अच्छी शुशबू, 
उल्टा फैल रहा है रोग महामारी । 
सबका बूरा हाल हो रहा है । 
कहीं बाढ़ तो कही सुखाड़ हो रहा है। 
कहीं बर्फ ही बर्फ तो 
कहीं प्राकृतिक ओला बारी । 
अब भी वक्त है, 
चलो प्रकृति के गोद में चलें , 
आओ अब घर लौट चलें । .. 

सारे बंधन तोड़ के 
अपने ही हाथों से, 
अब जाओगे किस ओर । 
नोटों का बंडल कब तक खाओगे, 
अपने हाथों से बनाए 
हवा से कब तक जिंदा रह पाओगे । 
कितना बड़ा है पेट तुम्हारा, 
जो प्रकृति भर ना पाएगा , 
ये मिट्टी के पुतले .... 
सबसे दामन छुड़ाकर 
अब तुम कहाँ जाओगे । 
शिवा प्रकृति के तुम्हे अपनाएगा कौन, 
तुमने सभी से धोखे और घात किये, 
मान ले बात कवि संयोग का, 
पकड़ आँचल प्रकृति का, चल
हम भी तेरे साथ चलें, 
आओ अब घर लौट चलें । 

ना धुप का डर , 
ना बारिस की चिंता, 
प्रकृति की गोद में 
चैन सुकून सेहत सब कुछ है मिलता , 
ना डर , ना लालच, 
चलो ऐसी सुरुआत करें। 
सादगी के साथ , 
प्रकृति को ओर चलें, 
आओ अब घर लौट चलें ।
                    Sanyog kumar Thakur 
          Come now let's go back home

   Everyone got smart.
   All the broken ties,
   We have become so wise.
   We are the only true
   We were never our own,
   In this pride,
   That was ours
   who walk this way,
 study by doing
   All great scholars
   Somebody made a cannon, somebody made a missile,
   The world has made many inventions.
   Destroying someone's house,
   Went to make the house my own,
   But forgot this thing,
   How can you find the peace of bean nature?
   Thinking what all the forests were destroyed,
   your life
   Destroyed by his own hands.
   By giving the blame nature,
   Don't know how - how people became great.
   flower garland around the neck,
   thunderous applause,
   Have people really become smart?
   Forgetting nature, where did we go?
   Come now let's go back home. ,

   Cut the forest, cut the autumn bush.
   Very built building, very palace attic.
   Much grown crop, garden fruit flower.
   Still did not get good health,
   Didn't get a good scent from the flower,
   On the contrary, the disease epidemic is spreading.
   Everyone is getting worse.
   Somewhere there is a flood and somewhere there is a drought.
   Somewhere there is snow
   Somewhere natural hail turn.
   There is still time
   Let's walk in the lap of nature
   Come now let's go back home. ,

   break all bonds
   with my own hands,
   Which way will you go now?
   How long will you eat a bundle of notes,
   make with your own hands
   How long can you survive in the air?
   How big is your stomach
   What nature will not be able to fill,
   These clay effigies...
   freeing the most
   where will you go now
   Who will adopt you except nature,
   You deceived and killed everyone,
   Let's say the poet is a coincidence,
   hold of nature, walk
   Let us also go with you
   Come now let's go back home.

   No fear of sun
   Don't worry about rain
   in the lap of nature
   Rest, peace, health is everything,
   no fear, no greed,
   Let's start like this.
   with simplicity,
   walk towards nature
   Come now let's go back home.
खूप अभ्यास केला,
  सगळे हुशार झाले.
  तुटलेली सारी नाती,
  आपण इतके शहाणे झालो आहोत.
  आम्हीच खरे
  आपण कधीच आपले नव्हतो,
  या अभिमानाने,
  ते आमचे होते
  जे या वाटेने चालतात,
  चल आता घरी परत जाऊया.  ,

  करून अभ्यास करा
  सर्व महान विद्वान
  कुणी तोफ बनवली, कुणी मिसाइल बनवली,
  जगाने अनेक शोध लावले आहेत.
  कुणाचे घर उध्वस्त करणे,
  घर स्वतःचं करायला गेलो होतो,
  पण ही गोष्ट विसरलो,
  बीन निसर्गाची शांती कशी मिळेल?
  सर्व जंगले काय नष्ट झाली याचा विचार करून,
  तुझं जीवन
  स्वतःच्या हातांनी नष्ट केला.
  स्वभावाला दोष देऊन,
  माणसं कशी महान झाली माहीत नाही.
  गळ्यात फुलांची माळ,
  टाळ्यांचा कडकडाट,
  लोक खरेच हुशार झाले आहेत का?
  निसर्गाला विसरून आपण कुठे गेलो?
  चल आता घरी परत जाऊया.  ,

  जंगल कट, शरद ऋतूतील बुश कट.
  अतिशय बांधलेली इमारत, अतिशय राजवाडा पोटमाळा.
  भरपूर पीक घेतले, बाग फळ फ्लॉवर.
  तरीही तब्येत बरी नाही,
  फुलातून चांगला सुगंध आला नाही,
  उलट रोगराई पसरत आहे.
  प्रत्येकजण वाईट होत आहे.
  कुठे पूर तर कुठे दुष्काळ.
  कुठेतरी बर्फ आहे
  कुठेतरी नैसर्गिक गारपीट.
  अजून वेळ आहे
  चला निसर्गाच्या कुशीत फिरूया
  चल आता घरी परत जाऊया.  ,

  सर्व बंध तोडून टाका
  माझ्या स्वतःच्या हातांनी,
  आता कुठल्या वाटेने जाणार?
  किती दिवस खाणार नोटांची बंडल,
  आपल्या स्वत: च्या हातांनी बनवा
  आपण हवेत किती काळ टिकू शकता?
  तुमचे पोट किती मोठे आहे
  जे निसर्ग भरून काढू शकणार नाही,
  हे मातीचे पुतळे...
  सर्वाधिक मुक्त करणे
  तू आता कुठे जाणार आहेस
  निसर्गाशिवाय तुला कोण दत्तक घेईल,
  तू सर्वांना फसवले आणि मारले,
  कवी हा योगायोग म्हणूया,
  निसर्गाला धरून चालणे
  आम्हाला पण तुमच्या सोबत जाऊ द्या
  चल आता घरी परत जाऊया.

  उन्हाची भीती नाही
  पावसाची काळजी करू नका
  निसर्गाच्या कुशीत
  शांती, शांती, आरोग्य हे सर्व काही आहे,
  भीती नाही, लोभ नाही,
  अशी सुरुवात करूया.
  साधेपणाने,
  निसर्गाकडे चाला
  चल आता घरी परत जाऊया.

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